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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन
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श्लोक 2
श्लोक
12.241.2
एतद् वै श्रोतुमिच्छामि तद् भवान् प्रब्रवीतु मे।
एतच्चान्योन्यवैरूप्ये वर्तेते प्रतिकूलत:॥ २॥
अनुवाद
मैं यह विषय सुनना चाहता हूँ, कृपया मुझे बताएँ। ये दोनों कथन एक-दूसरे के विपरीत हैं, इसलिए इनके परिणाम प्रतिकूल ही होंगे।
I want to hear this topic, please tell me this. These two statements are contrary to each other, hence they can only produce adverse results.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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