श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.241.16 
तदेतदृषिणा प्रोक्तं विस्तरेणानुमीयते।
नवजं शशिनं दृष्ट्वा वक्रतन्तुमिवाम्बरे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस तथ्य को एक मन्त्रदर्शी ऋषि ने विस्तारपूर्वक समझाया है। अमावस्या के बाद आकाश में टेढ़े-मेढ़े पतले धागे के समान दिखाई देने वाले नए उगते हुए चन्द्रमा को देखकर इसका अनुमान किया जाता है।॥16॥
 
‘This fact has been explained in detail by a sage who has seen mantras. After the new moon, this is inferred by looking at the newly emerging moon which appears like a crooked and thin thread in the sky.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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