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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.240.1 
व्यास उवाच
पृच्छतस्तव सत्पुत्र यथावदिह तत्त्वत:।
सांख्यज्ञानेन संयुक्तं यदेतत् कीर्तितं मया॥ १॥
 
 
अनुवाद
व्यास कहते हैं - 'हे शुकपुत्र! तुम्हारे प्रश्न के उत्तर में मैंने जो कुछ भी ज्ञान के विषय में यथार्थ रूप में यहाँ वर्णन किया है, वह सब बातें सांख्य ज्ञान से ही संबंधित हैं।॥1॥
 
Vyasa says, 'O son of Shuka! In response to your question, whatever I have described here in true form about the subject of knowledge, all these things are related to the knowledge of Sankhya.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)