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mahabharat 12.24.7: कुरुनन्दन! महाराज! पहले सर्वमेध और अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करो। इससे तुम्हें परम गति प्राप्त होगी।   |   mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.24.7 
सर्वमेधाश्वमेधाभ्यां यजस्व कुरुनन्दन।
तत: पश्चान्महाराज गमिष्यसि परां गतिम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! महाराज! पहले सर्वमेध और अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करो। इससे तुम्हें परम गति प्राप्त होगी।
 
'Kurunandan! Maharaj! First perform the rituals of Sarvamedha and Ashwamedha Yagyas. You will achieve ultimate speed through it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)