Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.24.30: ‘योग (कर्म के प्रति उत्साह) और न्यास (अहंकार आदि का त्याग) के साथ-साथ दैवी सिद्धियाँ, मानव सिद्धियाँ, न्यायनीति और पृथ्वी का पालन करते हुए पुण्यात्मा महात्मा राजा हयग्रीव अपने पुण्य के कारण इस समय देवताओं के लोक में सुख भोग रहे हैं ॥30॥ | mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दैवीं सिद्धिं मानुषीं दण्डनीतिं
योगन्यासै: पालयित्वा महीं च।
तस्माद् राजा धर्मशीलो महात्मा
वाजिग्रीवो मोदते देवलोके॥ ३०॥
अनुवाद
‘योग (कर्म के प्रति उत्साह) और न्यास (अहंकार आदि का त्याग) के साथ-साथ दैवी सिद्धियाँ, मानव सिद्धियाँ, न्यायनीति और पृथ्वी का पालन करते हुए पुण्यात्मा महात्मा राजा हयग्रीव अपने पुण्य के कारण इस समय देवताओं के लोक में सुख भोग रहे हैं ॥30॥
‘Through Yoga (enthusiasm for action) and Nyasa (renouncement of ego etc.) along with divine accomplishments, human accomplishments, judicial policy and following the earth, the virtuous Mahatma King Hayagriva enjoys happiness in the world of gods at this time due to his virtue. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥