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mahabharat 12.24.11: जो राजा उचित समय और स्थान की प्रतीक्षा करता है, जो शास्त्रों के ज्ञान का सहारा लेता है और लुटेरों के अपराधों को धैर्यपूर्वक सहन करता है, अर्थात उन्हें दण्ड देने में जल्दबाजी नहीं करता और उचित समय की प्रतीक्षा करता है, वह पाप में लिप्त नहीं होता।   |   mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.24.11 
देशकालप्रतीक्षी यो दस्यून् मर्षयते नृप:।
शास्त्रजां बुद्धिमास्थाय युज्यते नैनसा हि स:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो राजा उचित समय और स्थान की प्रतीक्षा करता है, जो शास्त्रों के ज्ञान का सहारा लेता है और लुटेरों के अपराधों को धैर्यपूर्वक सहन करता है, अर्थात उन्हें दण्ड देने में जल्दबाजी नहीं करता और उचित समय की प्रतीक्षा करता है, वह पाप में लिप्त नहीं होता।
 
'The king who waits for the right time and place, who takes recourse to the wisdom of the scriptures and tolerates patiently the crimes of the robbers, that is, he does not hurry in punishing them and waits for the right time, he does not get involved in sin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)