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mahabharat 12.238.4: कुछ लोग कर्म का कारण पुरुषार्थ बताते हैं, कुछ लोग प्रारब्ध (भविष्य) की प्रशंसा करते हैं, और कुछ लोग स्वभाव की प्रशंसा करते हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.238: नाना प्रकारके भूतोंकी समीक्षापूर्वक कर्मतत्त्वका विवेचन, युगधर्मका वर्णन एवं कालका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 238: नाना प्रकारके भूतोंकी समीक्षापूर्वक कर्मतत्त्वका विवेचन, युगधर्मका वर्णन एवं कालका महत्त्व  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.238.4 
पौरुषं कारणं केचिदाहु: कर्मसु मानवा:।
दैवमेके प्रशंसन्ति स्वभावमपरे जना:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग कर्म का कारण पुरुषार्थ बताते हैं, कुछ लोग प्रारब्ध (भविष्य) की प्रशंसा करते हैं, और कुछ लोग स्वभाव की प्रशंसा करते हैं॥4॥
 
Some people give the reason for their actions as effort. Some praise destiny (prarabdha or future) and others praise nature.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)