Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.238.19: इसी प्रकार काल भी अनेक रूप धारण करता है। उसका न आदि है, न अन्त। वह ही प्रजाओं का सृजन करता है और अन्त में सबको भस्म कर देता है। यह मैं तुमसे पहले ही कह चुका हूँ॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.238: नाना प्रकारके भूतोंकी समीक्षापूर्वक कर्मतत्त्वका विवेचन, युगधर्मका वर्णन एवं कालका महत्त्व । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निश्चितं कालनानात्वमनादिनिधनं च यत्।
कीर्तितं यत् पुरस्तान्मे सूते यच्चात्ति च प्रजा:॥ १९॥
अनुवाद
इसी प्रकार काल भी अनेक रूप धारण करता है। उसका न आदि है, न अन्त। वह ही प्रजाओं का सृजन करता है और अन्त में सबको भस्म कर देता है। यह मैं तुमसे पहले ही कह चुका हूँ॥19॥
Similarly, time has many forms. It has neither a beginning nor an end. It is the one who creates the people and in the end it consumes them all. I have already told you this.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥