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mahabharat 12.238.15: द्वापर और कलियुग में वेद प्रायः लुप्त हो जाते हैं। कलियुग के अन्त में वे कभी यहाँ दिखाई देते हैं और कभी बिल्कुल नहीं दिखाई देते॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.238: नाना प्रकारके भूतोंकी समीक्षापूर्वक कर्मतत्त्वका विवेचन, युगधर्मका वर्णन एवं कालका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 238: नाना प्रकारके भूतोंकी समीक्षापूर्वक कर्मतत्त्वका विवेचन, युगधर्मका वर्णन एवं कालका महत्त्व  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.238.15 
द्वापरे विप्लवं यान्ति वेदा: कलियुगे तथा।
दृश्यन्ते नापि दृश्यन्ते कलेरन्ते पुन: किल॥ १५॥
 
 
अनुवाद
द्वापर और कलियुग में वेद प्रायः लुप्त हो जाते हैं। कलियुग के अन्त में वे कभी यहाँ दिखाई देते हैं और कभी बिल्कुल नहीं दिखाई देते॥15॥
 
In Dwapara and Kali Yuga the Vedas usually disappear. In the last part of Kali Yuga they are sometimes seen here and sometimes not seen at all.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)