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परिनिष्ठितकार्यो हि स्वाध्यायेन द्विजो भवेत्।
कुर्यादन्यन्न वा कुर्यान्मैत्रो ब्राह्मण उच्यते॥ १३॥
अनुवाद
क्योंकि ब्राह्मण वेदों का अध्ययन करके पूर्ण होता है। चाहे वह कोई अन्य कार्य करे या न करे, वह ब्राह्मण कहलाता है, क्योंकि वह सभी जीवों के प्रति मैत्रीपूर्ण भाव रखता है।
Because a Brahmin is fulfilled by studying the Vedas. Whether he does any other work or not, he is called a Brahmin because he has a friendly attitude towards all living beings. 13.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥