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mahabharat 12.238.10: तपस्या के द्वारा मनुष्य ब्रह्मपद प्राप्त करता है, जिससे वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की रचना करता है। इस प्रकार ब्रह्मपद प्राप्त व्यक्ति समस्त प्राणियों का स्वामी बन जाता है। ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.238: नाना प्रकारके भूतोंकी समीक्षापूर्वक कर्मतत्त्वका विवेचन, युगधर्मका वर्णन एवं कालका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 238: नाना प्रकारके भूतोंकी समीक्षापूर्वक कर्मतत्त्वका विवेचन, युगधर्मका वर्णन एवं कालका महत्त्व  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.238.10 
तपसा तदवाप्नोति यद् भूत्वा सृजते जगत‍्।
तद् भूतश्च तत: सर्वभूतानां भवति प्रभु:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तपस्या के द्वारा मनुष्य ब्रह्मपद प्राप्त करता है, जिससे वह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की रचना करता है। इस प्रकार ब्रह्मपद प्राप्त व्यक्ति समस्त प्राणियों का स्वामी बन जाता है। ॥10॥
 
Through austerity a man achieves the state of Brahman, in which he creates the whole universe. Thus a person who has achieved the state of Brahman becomes the lord of all creatures. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)