श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.236.40 
यथा योगाद् विमुच्यन्ते कारणैर्यैर्निबोध तत्।
योगैश्वर्यमतिक्रान्तो यो निष्क्रामति मुच्यते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
अब मैं तुम्हें वह उपाय और कारण बताता हूँ जिससे योगी योग के फलस्वरूप मोक्ष प्राप्त करता है। सुनो। जो त्याग के बल से योगजनित ऐश्वर्य को लाँघकर उसकी सीमा से परे चला जाता है, वही मुक्त होता है ॥40॥
 
Now I shall tell you the manner and reasons by which a yogi attains salvation as a result of yoga. Listen. He who by the power of self-renunciation transcends the opulence generated by yoga and goes beyond its limits, he alone is liberated. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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