श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.236.27 
तथैव व्यक्तमात्मानमव्यक्तं प्रतिपद्यते।
यतो नि:सरते लोको भवति व्यक्तसंज्ञक:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उपरोक्त सात पदार्थों का परिणाम जो व्यक्त जगत है, वह अव्यक्त परमात्मा में लीन हो जाता है, क्योंकि यह जगत उसी परमात्मा से उत्पन्न है और अव्यक्त नाम धारण करता है ॥27॥
 
The manifest world, which is the result of the seven substances mentioned above, merges into the unmanifested God, because this world originates from the same God and bears the name of the unmanifested. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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