श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.236.25 
न चास्य तेजसा रूपं दृश्यते शाम्यते तथा।
अहङ्कारेऽस्य विजिते पञ्चैते स्युर्वशानुगा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अग्नितत्त्व पर विजय प्राप्त करने पर वह अपने शरीर को इतना तेजस्वी बना लेता है कि कोई उसकी ओर आँख उठाकर भी नहीं देख सकता और न ही कोई उसके तेज को बुझा सकता है। अहंकार पर विजय प्राप्त करने पर पाँचों तत्त्व योगी के वश में आ जाते हैं॥25॥
 
On mastering the fire element, he makes his body so radiant that no one can even look at him with raised eyes nor can anyone extinguish his radiance. On conquering the ego, all the five elements come under the control of the Yogi.॥25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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