Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.236.21: तत्पश्चात् अग्नि का नाश हो जाने और वायुतत्त्व पर विजय हो जाने पर वायु का सूक्ष्म रूप निर्मल आकाश में लीन हो जाता है और केवल नीला आकाश ही शेष रह जाता है। कहा जाता है कि उस अवस्था में ब्रह्मभाव की इच्छा रखने वाले योगी का मन अत्यंत सूक्ष्म हो जाता है। (उसे अपने स्थूल रूप का भी भान नहीं रहता। इसे वायु का विलयन और आकाशतत्त्व पर विजय कहते हैं)॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् अग्नि का नाश हो जाने और वायुतत्त्व पर विजय हो जाने पर वायु का सूक्ष्म रूप निर्मल आकाश में लीन हो जाता है और केवल नीला आकाश ही शेष रह जाता है। कहा जाता है कि उस अवस्था में ब्रह्मभाव की इच्छा रखने वाले योगी का मन अत्यंत सूक्ष्म हो जाता है। (उसे अपने स्थूल रूप का भी भान नहीं रहता। इसे वायु का विलयन और आकाशतत्त्व पर विजय कहते हैं)॥21॥
Thereafter, after the destruction of the fire and victory over the air element, the subtle form of the air gets absorbed in the clear sky and only the blue sky remains. It is said that in that state, the mind of the yogi who wishes to attain Brahmabhaav becomes extremely subtle. (He is not even aware of his gross form. This is called the dissolution of the air and victory over the sky element)॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥