श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.236.2 
प्रज्ञया निश्चिता धीरास्तारयन्त्यबुधान् प्लवै:।
नाबुधास्तारयन्त्यन्यानात्मानं वा कथंचन॥ २॥
 
 
अनुवाद
जो ज्ञानी पुरुष अपनी बुद्धि से सत्य का पूर्ण निश्चय कर लेते हैं, वे अपने ज्ञानरूपी नौका से अन्य अज्ञानियों को भवसागर से पार उतार देते हैं। किन्तु जो अज्ञानी हैं, वे न तो दूसरों का उद्धार कर पाते हैं और न स्वयं का ही उद्धार कर पाते हैं॥2॥
 
Those wise men, who have fully determined the truth through their intellect, help other ignorant people cross the ocean of existence with the boat of their knowledge. But those who are ignorant are neither able to save others nor can they save themselves in any way. ॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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