Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.236.18: देह-चेतना से मुक्त योगी के अनुभव का यह प्रथम रूप है। जब कुहासा छँट जाता है, तब दूसरा रूप दिखाई देता है ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.236.18 
तथा देहाद् विमुक्तस्य पूर्वं रूपं भवत्युत।
अथ धूमस्य विरमे द्वितीयं रूपदर्शनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
देह-चेतना से मुक्त योगी के अनुभव का यह प्रथम रूप है। जब कुहासा छँट जाता है, तब दूसरा रूप दिखाई देता है ॥18॥
 
This is the first aspect of the experience of a Yogi who is free from body consciousness. When the fog clears, the second aspect is seen. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)