| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति » श्लोक 15 |
|
| | | | श्लोक 12.236.15  | क्रमश: पार्थिवं यच्च वायव्यं खं तथा पय:।
ज्योतिषो यत् तदैश्वर्यमहङ्कारस्य बुद्धित:।
अव्यक्तस्य तथैश्वर्यं क्रमश: प्र्रतिपद्यते॥ १५॥ | | | | | | अनुवाद | | साधक धीरे-धीरे पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, अहंकार और बुद्धि के ऐश्वर्यों पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है। तत्पश्चात् वह धीरे-धीरे अव्यक्त ब्रह्म के ऐश्वर्य को प्राप्त करता है॥15॥ | | | | The seeker gradually gains control over the opulences of earth, water, fire, air, sky, ego and intellect. After this, he gradually attains the opulence of the unmanifested Brahma*॥ 15॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|