| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 236: ध्यानके सहायक योग, उनके फल और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन तथा सांख्य एवं योगके अनुसार ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 12.236.1  | व्यास उवाच
अथ चेद् रोचयेदेतदुह्येत स्रोतसा यथा।
उन्मज्जंश्च निमज्जंश्च ज्ञानवान् प्लववान् भवेत् ॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | व्यासजी कहते हैं, "बेटा! जैसे मनुष्य जल के प्रवाह में डूबता और तैरता रहता है और यदि संयोगवश उसे नाव मिल जाए, तो वह उसकी सहायता से दूसरे किनारे पहुँच जाता है। उसी प्रकार संसार सागर में डूबता और तैरता हुआ मनुष्य यदि इस संकट से मुक्त होना चाहता है, तो उसे ज्ञानरूपी नाव का आश्रय लेना चाहिए॥1॥ | | | | Vyasa says, "Son, just as a man keeps on drowning and floating in the current of water and if by chance he finds a boat, he can reach the other side with its help. Similarly, if a man who is drowning and floating in the ocean of the world wants to be free from this danger, then he should take shelter of the boat of knowledge.॥ 1॥ | | ✨ ai-generated | | |
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