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mahabharat 12.232.43: बेटा! तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था, उसके अनुसार मैंने तुम्हें सृष्टि, काल, कर्म, वेद, कर्ता, कर्म और कर्मफल आदि के विषय में बताया है॥43॥   |   mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.232.43 
सर्गकालक्रिया वेदा: कर्ता कार्यं क्रियाफलम्।
प्रोक्तं ते पुत्र सर्वं वै यन्मां त्वं परिपृच्छसि॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
बेटा! तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था, उसके अनुसार मैंने तुम्हें सृष्टि, काल, कर्म, वेद, कर्ता, कर्म और कर्मफल आदि के विषय में बताया है॥43॥
 
Son! According to whatever you had asked me, I told you about the creation, time, action, Vedas, doer, action and result of action etc. ॥ 43॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकानुप्रश्ने द्वात्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवजीका अनुप्रश्नविषयक दो सौ बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)