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mahabharat 12.232.42: काल ही सब जीवों को वश में रखता है, अनुशासन में रखता है, उनके जन्म का स्थान भी निर्धारित करता है, स्वभावतः ही सब जीव संघर्षों से भरे रहते हैं और बहुत दुःख भोगते हैं ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.232.42 
दधाति प्रभवे स्थानं भूतानां संयमो यम:।
स्वभावेनैव वर्तन्ते द्वन्द्वयुक्तानि भूरिश:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
काल ही सब जीवों को वश में रखता है, अनुशासन में रखता है, उनके जन्म का स्थान भी निर्धारित करता है, स्वभावतः ही सब जीव संघर्षों से भरे रहते हैं और बहुत दुःख भोगते हैं ॥ 42॥
 
Time is the one who keeps all living beings under control and discipline. It is he who determines the place for their birth. All living beings are naturally filled with conflicts and suffer a lot. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)