Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.232.19: कुछ लोग कर्मों की सफलता के लिए पुरुषार्थ को ही प्रधान मानते हैं। अन्य ब्राह्मण भाग्य को प्रधानता देते हैं और भूतकाल का विचार करने वाले नास्तिक लोग स्वभाव को ही कर्मों की सफलता का कारण मानते हैं।॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुछ लोग कर्मों की सफलता के लिए पुरुषार्थ को ही प्रधान मानते हैं। अन्य ब्राह्मण भाग्य को प्रधानता देते हैं और भूतकाल का विचार करने वाले नास्तिक लोग स्वभाव को ही कर्मों की सफलता का कारण मानते हैं।॥19॥
Some people consider effort to be the most important factor in achieving success in deeds. Other Brahmins give priority to destiny and the atheists who think about the past consider nature to be the reason for success in deeds.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥