Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.232.18: आकाश आदि महान प्राणियों में, शब्द आदि विषयों में, देवताओं आदि की आकृतियों में जो अनेकता और विविधता है तथा जीवों की भिन्न-भिन्न कार्यों में जो नियुक्ति है, इन सबकी व्यवस्था विधाता ने ही की है ॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाभूतेषु नानात्वमिन्द्रियार्थेषु मूर्तिषु।
विनियोगं च भूतानां धातैव विदधात्युत॥ १८॥
अनुवाद
आकाश आदि महान प्राणियों में, शब्द आदि विषयों में, देवताओं आदि की आकृतियों में जो अनेकता और विविधता है तथा जीवों की भिन्न-भिन्न कार्यों में जो नियुक्ति है, इन सबकी व्यवस्था विधाता ने ही की है ॥18॥
The diversity and diversity in the great beings like sky, in subjects like words, etc., in the figures of gods etc. and the appointment of living beings in different tasks, all these are arranged by the creator only. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥