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सर्वभूतान्युपादाय तपसश्चरणाय हि।
आदिकर्ता स भूतानां तमेवाहु: प्रजापतिम्॥ १३॥
अनुवाद
समस्त प्राणियों के आदि रचयिता ब्रह्मा तपस्या के लिए सूक्ष्म तत्त्वों सहित स्थूल शरीर में प्रवेश करते हैं; इसलिए ऋषिगण उन्हें प्रजापति कहते हैं ॥13॥
Brahma, the original creator of all beings, enters the gross body along with all the subtle elements for penance; hence the sages call him Prajapati. ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥