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mahabharat 12.232.13: समस्त प्राणियों के आदि रचयिता ब्रह्मा तपस्या के लिए सूक्ष्म तत्त्वों सहित स्थूल शरीर में प्रवेश करते हैं; इसलिए ऋषिगण उन्हें प्रजापति कहते हैं ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.232.13 
सर्वभूतान्युपादाय तपसश्चरणाय हि।
आदिकर्ता स भूतानां तमेवाहु: प्रजापतिम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणियों के आदि रचयिता ब्रह्मा तपस्या के लिए सूक्ष्म तत्त्वों सहित स्थूल शरीर में प्रवेश करते हैं; इसलिए ऋषिगण उन्हें प्रजापति कहते हैं ॥13॥
 
Brahma, the original creator of all beings, enters the gross body along with all the subtle elements for penance; hence the sages call him Prajapati. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)