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mahabharat 12.232.10: ये सात पदार्थ - प्राण, मन (अहंकार) और नाना प्रकार की शक्तियों वाले पाँच सूक्ष्म तत्त्व - जब तक सब मिल नहीं जाते, तब तक पृथक् रहते हैं; तब तक उसमें प्रजा उत्पन्न करने की शक्ति नहीं थी ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 232: व्यासजीका शुकदेवको सृष्टिके उत्पत्ति-क्रम तथा युगधर्मोंका उपदेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.232.10 
एते सप्तविधात्मानो नानावीर्या: पृथक् पृथक्।
नाशक्नुवन् प्रजा: स्रष्टुमसमागम्य कृत्स्नश:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ये सात पदार्थ - प्राण, मन (अहंकार) और नाना प्रकार की शक्तियों वाले पाँच सूक्ष्म तत्त्व - जब तक सब मिल नहीं जाते, तब तक पृथक् रहते हैं; तब तक उसमें प्रजा उत्पन्न करने की शक्ति नहीं थी ॥10॥
 
These seven substances – the vital essence, the mind (ego) and the five subtle elements with different types of powers – remain separate until they all meet; Till then he did not have the power to create a people. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)