Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.229.8: देवल! चाहे कोई महात्माओं की निन्दा करे, प्रशंसा करे, अथवा उनके सदाचार और पुण्यकर्मों को छिपाने का प्रयत्न करे, वे सबके साथ एक जैसा व्यवहार करते हैं ॥8॥ | mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निन्दत्सु च समा नित्यं प्रशंसत्सु च देवल।
निह्नवन्ति च ये तेषां समयं सुकृतं च यत्॥ ८॥
अनुवाद
देवल! चाहे कोई महात्माओं की निन्दा करे, प्रशंसा करे, अथवा उनके सदाचार और पुण्यकर्मों को छिपाने का प्रयत्न करे, वे सबके साथ एक जैसा व्यवहार करते हैं ॥8॥
Deval! No matter whether someone criticises the great souls or praises them or tries to cover up their good conduct and pious deeds, they treat everyone with the same attitude. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥