Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.229.7: जैगीषव्य बोले - हे महामुनि! मैं आपसे उस परम ज्ञान का वर्णन करूँगा जिसके द्वारा पुण्यकर्म करने वाले महापुरुष उत्तम गति, उन्नति की सर्वोच्च सीमा और परम शांति को प्राप्त होते हैं॥ 7॥ | mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैगीषव्य उवाच
या गतिर्या परा काष्ठा या शान्ति: पुण्यकर्मणाम्।
तां तेऽहं सम्प्रवक्ष्यामि महतीमृषिसत्तम॥ ७॥
अनुवाद
जैगीषव्य बोले - हे महामुनि! मैं आपसे उस परम ज्ञान का वर्णन करूँगा जिसके द्वारा पुण्यकर्म करने वाले महापुरुष उत्तम गति, उन्नति की सर्वोच्च सीमा और परम शांति को प्राप्त होते हैं॥ 7॥
Jaigishavya said - O great sage! I shall describe to you the supreme wisdom by which the great men who perform pious deeds attain the best destination, the highest limit of progress and the ultimate peace. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥