Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.229.18: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जो लोग धर्म के मार्ग पर चलते हैं, वे ही धर्म को जानते हैं और जो लोग धर्म के मार्ग से भटक जाते हैं, वे ही सुख-चिन्ता आदि का अनुभव करते हैं॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.229: जैगीषव्यका असित-देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये धर्मं चानुरुद्धॺन्ते धर्मज्ञा द्विजसत्तम।
ये ह्यतो विच्युता मार्गात् ते हृष्यन्त्युद्विजन्ति च॥ १८॥
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जो लोग धर्म के मार्ग पर चलते हैं, वे ही धर्म को जानते हैं और जो लोग धर्म के मार्ग से भटक जाते हैं, वे ही सुख-चिन्ता आदि का अनुभव करते हैं॥18॥
O best of Brahmins! Those who follow the path of Dharma, they are the ones who know Dharma. And those who stray from the path of Dharma, they are the ones who experience happiness and anxiety etc.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥