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mahabharat 12.226.6-7h: अतः बुद्धिमान् पुरुष को चाहिए कि वह द्वेष के कारण प्राप्त होने वाले दुःखों को दूर करके अपने हृदय में स्थित कल्याणकारी भगवान् का चिन्तन करे । 6 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.226: इन्द्र और नमुचिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 226: इन्द्र और नमुचिका संवाद  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  12.226.6-7h 
विनीय खलु तद् दु:खमागतं वैमनस्यजम्॥ ६॥
ध्यातव्यं मनसा हृद्यं कल्याणं संविजानता।
 
 
अनुवाद
अतः बुद्धिमान् पुरुष को चाहिए कि वह द्वेष के कारण प्राप्त होने वाले दुःखों को दूर करके अपने हृदय में स्थित कल्याणकारी भगवान् का चिन्तन करे । 6 1/2॥
 
Therefore, a wise man should get rid of the sorrows he gets due to animosity and should think about the benevolent God situated in his heart. 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)