श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 226: इन्द्र और नमुचिका संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.226.4 
नमुचिरुवाच
अनिवार्येण शोकेन शरीरं चोपतप्यते।
अमित्राश्च प्रहृष्यन्ति शोके नास्ति सहायता॥ ४॥
 
 
अनुवाद
नमुचि ने कहा - हे देवराज! यदि शोक का निवारण न किया जाए, तो वह शरीर को कष्ट देता है और शत्रुओं को प्रसन्न करता है। विपत्ति दूर करने में शोक किसी काम नहीं आता।॥4॥
 
Namuchi said - O king of gods! If grief is not stopped, it torments the body and makes the enemies happy. Grief is of no help in removing the calamity. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)