Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.226.23: जो मनुष्य इसे भली-भाँति जानता है और कभी मोहग्रस्त नहीं होता, वह सब प्रकार के दुःखों से सुरक्षित रहता है और सब प्रकार से धन्य होता है ॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.226: इन्द्र और नमुचिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतद् विदित्वा कात्स्न्र्येन यो न मुह्यति मानव:।
कुशली सर्वदु:खेषु स वै सर्वधनो नर:॥ २३॥
अनुवाद
जो मनुष्य इसे भली-भाँति जानता है और कभी मोहग्रस्त नहीं होता, वह सब प्रकार के दुःखों से सुरक्षित रहता है और सब प्रकार से धन्य होता है ॥23॥
A person who fully knows this and is never deluded remains safe from all kinds of suffering and is blessed in every way. ॥23॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शक्रनमुचिसंवादो नाम षड्विंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें इन्द्र और नमुचिका संवादनामक दो सौ छब्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥