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भूतिर्लक्ष्मीति मामाहु: श्रीरित्येवं च वासव।
त्वं मां शक्र न जानीषे सर्वे देवा न मां विदु:॥ ८॥
अनुवाद
वासव! ज्ञानी लोग मुझे भूति, लक्ष्मी और श्री भी कहते हैं। शक्र! तुम मुझे नहीं जानते और समस्त देवताओं को भी मेरे विषय में कुछ ज्ञान नहीं है। 8।
Vasava! Knowledgeable people also call me Bhooti, Lakshmi and Shri. Sakra! You do not know me and even all the gods do not have any knowledge about me. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥