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mahabharat 12.225.7: लक्ष्मी बोलीं- न तो विरोचन मुझे जानते हैं और न ही उनके पुत्र बलि। लोग मुझे दु:सह कहते हैं और कुछ लोग मुझे विदित्सा के नाम से भी जानते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.225.7 
श्रीरुवाच
न मां विरोचनो वेद नायं वैरोचनो बलि:।
आहुर्मां दु:सहेत्येवं विधित्सेति च मां विदु:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी बोलीं- न तो विरोचन मुझे जानते हैं और न ही उनके पुत्र बलि। लोग मुझे दु:सह कहते हैं और कुछ लोग मुझे विदित्सा के नाम से भी जानते हैं।
 
Lakshmi said- Neither Virochana knows me nor his son Bali. People call me Dusaha and some people also know me by the name of Vidhitsa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)