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mahabharat 12.225.5-6: तब इन्द्र ने पूछा- हे निर्मल मुस्कान वाली सुन्दरी! आप कौन हैं, जो कन्या के शरीर से प्रकट हुई हैं? आपकी कांति अद्भुत है। आपकी वेणी भी अत्यंत सुंदर है। मैं आपको नहीं जानता, इसीलिए पूछ रहा हूँ। आप अपना नाम बताइए। शुभ्र! आप कौन हैं, जो दैत्यराज को छोड़कर इस प्रकार खड़ी होकर अपने तेज से मुझे प्रकाशित कर रही हैं? मेरे प्रश्न के अनुसार अपना परिचय दीजिए। ॥5-6॥   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  12.225.5-6 
शक्र उवाच
का त्वं बलेरपक्रान्ता रोचमाना शिखण्डिनी।
अजानतो ममाचक्ष्व नामधेयं शुचिस्मिते॥ ५॥
का त्वं तिष्ठसि मामेवं दीप्यमाना स्वतेजसा।
हित्वा दैत्यवरं सुभ्रु तन्ममाचक्ष्व पृच्छत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र ने पूछा- हे निर्मल मुस्कान वाली सुन्दरी! आप कौन हैं, जो कन्या के शरीर से प्रकट हुई हैं? आपकी कांति अद्भुत है। आपकी वेणी भी अत्यंत सुंदर है। मैं आपको नहीं जानता, इसीलिए पूछ रहा हूँ। आप अपना नाम बताइए। शुभ्र! आप कौन हैं, जो दैत्यराज को छोड़कर इस प्रकार खड़ी होकर अपने तेज से मुझे प्रकाशित कर रही हैं? मेरे प्रश्न के अनुसार अपना परिचय दीजिए। ॥5-6॥
 
Then Indra asked- O beautiful one with a pure smile! Who are you, emerging from the body of the girl? Your radiance is wonderful. Your braid is also very beautiful. I do not know you; that is why I am asking. You tell me your name. Subhru! Who are you, standing like this, illuminating me with your brilliance, leaving behind the demon king? Introduce yourself as per my question. ॥ 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)