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राजा बालिका के अहंकार से युक्त पूर्वोक्त वचन सुनकर सहस्त्र नेत्रों वाला इन्द्र पुनः आकाश में उड़ गया।
On hearing the aforesaid words of King Balika containing arrogance, the thousand-eyed Indra again flew into the sky.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि श्रीसंनिधानो नाम पञ्चविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें श्रीसंनिधाननामक दो सौ पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥