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mahabharat 12.225.36: उनके दो मार्ग हैं - उत्तर और दक्षिण। उत्तरायण छह महीने और दक्षिणायन छह महीने का होता है। उसी से सूर्यदेव संसार भर में भ्रमण करते हैं और शीत और ग्रीष्म ऋतु का निर्माण करते हैं॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.225.36 
अयनं तस्य षण्मासानुत्तरं दक्षिणं तथा।
येन संयाति लोकेषु शीतोष्णे विसृजन् रवि:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उनके दो मार्ग हैं - उत्तर और दक्षिण। उत्तरायण छह महीने और दक्षिणायन छह महीने का होता है। उसी से सूर्यदेव संसार भर में भ्रमण करते हैं और शीत और ग्रीष्म ऋतु का निर्माण करते हैं॥ 36॥
 
They have two routes- north and south. Uttarayan lasts for six months and Dakshinayan lasts for six months. From that the Sun God travels throughout the world creating winter and summer.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)