श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.225.35 
स्थापितो ह्यस्य समय: पूर्वमेव स्वयम्भुवा।
अजस्रं परियात्येष सत्येनावतपन् प्रजा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने पहले ही उनकी सीमा निर्धारित कर दी है, अतः उस सत्य सीमा के अनुसार सूर्य समस्त लोकों को गर्मी प्रदान करते हुए निरंतर परिक्रमा करते रहते हैं ॥ 35॥
 
Brahmaji has already set limits for them, hence in accordance with that true limit the Sun keeps revolving continuously providing heat to all the worlds. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)