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mahabharat 12.225.34: हे दैत्यराज! जहाँ चाहो वहाँ चले जाओ। हे दैत्यराज! तुम्हारा कल्याण हो। सूर्य कभी भी मध्याह्न के समय स्थित नहीं होगा और समस्त लोकों को गर्मी नहीं देगा। ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.225.34 
यथेष्टं गच्छ दैत्येन्द्र स्वस्ति तेऽस्तु महासुर।
आदित्यो नैव तपिता कदाचिन्मध्यत: स्थित:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! जहाँ चाहो वहाँ चले जाओ। हे दैत्यराज! तुम्हारा कल्याण हो। सूर्य कभी भी मध्याह्न के समय स्थित नहीं होगा और समस्त लोकों को गर्मी नहीं देगा। ॥34॥
 
O King of Demons! Go wherever you wish. O great demon! May you be blessed. The Sun will never be situated at noon and will not give heat to all the worlds. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)