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mahabharat 12.225.28: लक्ष्मी बोलीं- इन्द्र! मैंने इसे अपना चौथा पग मान रखा है। अब यह पुण्यात्माओं में प्रतिष्ठित है। इसी प्रकार तुम मुझे समस्त प्राणियों में स्थापित करो और सब ओर से मेरी रक्षा करो। 28.   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.225.28 
श्रीरुवाच
एष मे निहित: पादो योऽयं सत्सु प्रतिष्ठित:।
एवं हि निहितां शक्र भूतेषु परिधत्स्व माम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी बोलीं- इन्द्र! मैंने इसे अपना चौथा पग मान रखा है। अब यह पुण्यात्माओं में प्रतिष्ठित है। इसी प्रकार तुम मुझे समस्त प्राणियों में स्थापित करो और सब ओर से मेरी रक्षा करो। 28.
 
Lakshmi said- Indra! I have kept this as my fourth foot. Now it is established among the virtuous people. Similarly, you should establish me among all the living beings and protect me from all sides. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)