शक्र उवाच
ये वै सन्तो मनुष्येषु ब्रह्मण्या: सत्यवादिन:।
ते ते पादं तितिक्षन्तामलं सन्तस्तितिक्षितुम्॥ २७॥
अनुवाद
इन्द्र ने कहा - "देवी! मनुष्यों में श्रेष्ठ पुरुष जो ब्रह्मभक्त और सत्यवादी हैं, वे आपके चौथे चरण का भार उठाएं; क्योंकि श्रेष्ठ पुरुष ही उसे उठाने में पूर्णतः समर्थ हैं॥ 27॥
Indra said, "Devi! The best men amongst the humans who are devotees of Brahman and truthful, should bear the weight of your fourth foot; because the best men are fully capable of bearing it.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥