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mahabharat 12.225.26: लक्ष्मी बोलीं- इन्द्र! मैंने यह तीसरा पैर अग्नि में रख दिया है। अब यह अग्नि में स्थापित हो गया है। इसके बाद तुम मेरे चौथे पैर को भी ठीक से स्थापित करो॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.225.26 
श्रीरुवाच
एष मे निहित: पादो योऽयमग्नौ प्रतिष्ठित:।
चतुर्थं शक्र पादं मे तस्मात् सुनिहितं कुरु॥ २६॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी बोलीं- इन्द्र! मैंने यह तीसरा पैर अग्नि में रख दिया है। अब यह अग्नि में स्थापित हो गया है। इसके बाद तुम मेरे चौथे पैर को भी ठीक से स्थापित करो॥ 26॥
 
Lakshmi said- Indra! I have placed this third foot in the fire. Now it is established in the fire. After this, establish my fourth foot properly.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)