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mahabharat 12.225.24: लक्ष्मी बोलीं - इन्द्र! देखो, मैंने यह पैर जल में रख दिया है। अब यह जल में अच्छी तरह स्थापित हो गया है। अब तुम मेरे तीसरे पैर को ठीक से स्थापित करो॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.225.24 
श्रीरुवाच
एष मे निहित: पादो योऽयमप्सु प्रतिष्ठित:।
तृतीयं शक्र पादं मे तस्मात् सुनिहितं कुरु॥ २४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी बोलीं - इन्द्र! देखो, मैंने यह पैर जल में रख दिया है। अब यह जल में अच्छी तरह स्थापित हो गया है। अब तुम मेरे तीसरे पैर को ठीक से स्थापित करो॥ 24॥
 
Lakshmi said - Indra! Look, I have placed this foot in the water. Now it is well established in the water. Now you establish my third foot properly.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)