श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.225.19 
श्रीरुवाच
स्थास्यामि नित्यं देवेन्द्र यथा त्वयि निबोध तत्।
विधिना वेददृष्टेन चतुर्धा विभजस्व माम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी बोलीं - "देवेन्द्र! मैं तुम्हें वह उपाय बता रही हूँ जिससे मैं सदा तुम्हारे समीप रह सकूँगी। सुनो। वेदों में वर्णित विधि से मुझे चार भागों में विभाजित करो।"
 
Lakshmi said - Devendra! I am telling you the way by which I will be able to stay near you forever. Listen. Divide me into four parts by the method mentioned in the Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)