श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.225.18 
शक्र उवाच
तिष्ठेथा मयि नित्यं त्वं यथा तद् ब्रूहि मे शुभे।
तत् करिष्यामि ते वाक्यमृतं तद् वक्तुमर्हसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र बोले- शुभ! मुझे वह उपाय बताइए जिससे आप सदैव मेरे समीप रह सकें। मैं आपकी आज्ञा का यथावत् पालन करूँगा; क्योंकि आप ही मुझे वह उपाय बता सकते हैं॥ 18॥
 
Indra said- Shubh! Tell me the way by which you can always stay near me. I will follow your order exactly; because you can surely tell me that way.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)