Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.225.17: लक्ष्मीजी ने कहा, "पुरंदर! देवता, गंधर्व, असुर और राक्षस कोई भी मेरा भार अकेले नहीं उठा सकता।"   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.225.17 
श्रीरुवाच
नैव देवो न गन्धर्वो नासुरो न च राक्षस:।
यो मामेको विषहितुं शक्त: कश्चित् पुरंदर॥ १७॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मीजी ने कहा, "पुरंदर! देवता, गंधर्व, असुर और राक्षस कोई भी मेरा भार अकेले नहीं उठा सकता।"
 
Laxmi said, "Purandara! None of the demigods, Gandharvas, Asuras and demons can bear my weight alone."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)