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mahabharat 12.225.15: हे वासव! उनके द्वारा इस प्रकार तिरस्कृत होकर अब मैं तुम्हारे पास निवास करूँगा। तुम सदैव सावधान रहो और अपनी तपस्या तथा पराक्रम से मुझे धारण करो।   |   mahabharat अध्याय 12.225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.225.15 
अपाकृता तत: शक्र त्वयि वत्स्यामि वासव।
अप्रमत्तेन धार्यास्मि तपसा विक्रमेण च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे वासव! उनके द्वारा इस प्रकार तिरस्कृत होकर अब मैं तुम्हारे पास निवास करूँगा। तुम सदैव सावधान रहो और अपनी तपस्या तथा पराक्रम से मुझे धारण करो।
 
Vasava! Having been thus despised by them I shall now reside in you. You must always be cautious and hold me by your penance and valour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)