Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.5: बलि ने कहा - इन्द्र ! कालचक्र स्वभाव से ही परिवर्तनशील है, इसी कारण मैं यहाँ की प्रत्येक वस्तु को अनित्य मानता हूँ, इसीलिए मैं कभी शोक नहीं करता; क्योंकि यह सम्पूर्ण जगत् नाशवान है ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बलिरुवाच
अनित्यमुपलक्ष्येह कालपर्यायधर्मत:।
तस्माच्छक्र न शोचामि सर्वं ह्येवेदमन्तवत्॥ ५॥
अनुवाद
बलि ने कहा - इन्द्र ! कालचक्र स्वभाव से ही परिवर्तनशील है, इसी कारण मैं यहाँ की प्रत्येक वस्तु को अनित्य मानता हूँ, इसीलिए मैं कभी शोक नहीं करता; क्योंकि यह सम्पूर्ण जगत् नाशवान है ॥5॥
Bali said - Indra! The time cycle is changeable by nature, due to it I consider everything here to be temporary, that is why I never grieve; because this whole world is perishable. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥