नाहं कर्ता न चैव त्वं नान्य: कर्ता शचीपते।
पर्यायेण हि भुज्यन्ते लोका: शक्र यदृच्छया॥ ४५॥
अनुवाद
हे शचीदेव इन्द्र! न मैं कर्ता हूँ, न आप कर्ता हैं, न ही कोई दूसरा कर्ता है। काल अपनी इच्छानुसार एक-एक करके समस्त लोकों को ग्रसता है।
O lord of Shachi, Indra! Neither I am the doer, nor you are the doer, nor is there anyone else who is the doer. Time consumes all the worlds one by one according to its will.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥