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mahabharat 12.224.42: हे वासव! मैं सूर्य के रूप में अपनी किरणों से पृथ्वी का जल ऊपर उठाता था और मेघ के रूप में वर्षा करता था। मैं तीनों लोकों को तपता था और विद्युत के रूप में प्रकाश फैलाता था। 42।   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.224.42 
अहमेवोद्वहाम्यापो विसृजामि च वासव।
तपामि चैव त्रैलोक्यं विद्योताम्यहमेव च॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे वासव! मैं सूर्य के रूप में अपनी किरणों से पृथ्वी का जल ऊपर उठाता था और मेघ के रूप में वर्षा करता था। मैं तीनों लोकों को तपता था और विद्युत के रूप में प्रकाश फैलाता था। 42।
 
Vasava! I used to raise the water of the earth with my rays as the Sun and I used to rain as the clouds. I used to heat the three worlds and spread light as electricity. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)