श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.224.39 
न तु विक्रमकालोऽयं शान्तिकालोऽयमागत:।
काल: स्थापयते सर्वं काल: पचति वै तथा॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
परंतु यह मेरे लिए वीरता दिखाने का समय नहीं है; प्रत्युत शान्त रहने का समय है। काल ही सबको भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में रखकर धारण करता है और काल ही सबको पकाता (नष्ट) है॥ 39॥
 
But this is not the time for me to display my valour; rather it is time to remain calm. Time itself maintains everyone by placing them in different states and time itself ripens (destroys) everyone.॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)